इस्तांबुल एयरपोर्ट ने रचा इतिहास, हीथ्रो को पछाड़ बना दुनिया का सबसे कनेक्टेड एयरपोर्ट

350 शहरों से सीधा जुड़ा इस्तांबुल एयरपोर्ट

इस्तांबुल। यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला तुर्की का इस्तांबुल अब वैश्विक विमानन मानचित्र पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुका है। आईजीए इस्तांबुल एयरपोर्ट ने दुनिया के सबसे बेहतर कनेक्टेड एयरपोर्ट का खिताब अपने नाम कर लिया है। ओएजी के मेगाहब्स 2026 इंडेक्स में इस्तांबुल ने लंदन के हीथ्रो को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। वहीं एम्स्टर्डम शिफोल तीसरे, कुआलालंपुर चौथे और शिकागो ओ’हारे पांचवें पायदान पर रहे।

ओएजी की यह रैंकिंग एयरपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, उपलब्ध उड़ानों, उड़ानों के बीच संभावित कनेक्शन और वहां से जुड़े गंतव्यों की संख्या जैसे मानकों के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए 2 अगस्त के उड़ान आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इस्तांबुल एयरपोर्ट वर्तमान में दुनिया के करीब 350 गंतव्यों से जुड़ा हुआ है, जबकि भविष्य में इसकी कनेक्टिविटी और बढ़ने की संभावना है।

मैनहट्टन से भी बड़ा है एयरपोर्ट परिसर

इस्तांबुल एयरपोर्ट का निर्माण करीब 12 अरब डॉलर की लागत से किया गया और वर्ष 2018 में इसका संचालन शुरू हुआ। शहर के यूरोपीय हिस्से से करीब 20 मील दूर स्थित यह विशाल एयरपोर्ट लगभग 76.5 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। इसका कुल क्षेत्रफल न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से भी ज्यादा है।

एयरपोर्ट का मुख्य टर्मिनल करीब 1.4 मिलियन वर्ग मीटर में फैला हुआ है। यहां हर साल 8.4 करोड़ से अधिक यात्री आवाजाही करते हैं। हालांकि भविष्य में यात्रियों की संख्या को देखते हुए मौजूदा क्षमता को काफी बढ़ाने की तैयारी है। दीर्घकालिक योजना के तहत एयरपोर्ट को सालाना 20 करोड़ यात्रियों को संभालने लायक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

ओएजी के मुख्य विश्लेषक जॉन ग्रांट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी इस्तांबुल की स्थिति मजबूत रह सकती है। पर्याप्त रनवे क्षमता, तुर्की एयरलाइंस का तेजी से विस्तार और मध्य एशिया के उभरते विमानन बाजारों से इसकी भौगोलिक नजदीकी एयरपोर्ट के लिए बड़ी ताकत है।

9 रनवे तैयार करने की योजना

इस्तांबुल एयरपोर्ट ने हाल ही में अपना चौथा मुख्य रनवे भी शुरू किया है। 2,820 मीटर लंबे इस रनवे की दिशा पूर्व-पश्चिम है। इससे पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों के लिए टैक्सीिंग और उड़ान संचालन का समय कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही ईंधन की भी बचत संभव है।

एयरपोर्ट की दीर्घकालिक योजना कुल 9 रनवे विकसित करने की है। इनमें 6 मुख्य और 3 रिजर्व रनवे शामिल होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्तांबुल दुनिया के चुनिंदा ऐसे एयरपोर्टों में शामिल है जिन्हें एक साथ तीन रनवे संचालित करने की अनुमति मिली है। इससे व्यस्त समय में अधिक उड़ानों का संचालन और समय की पाबंदी बेहतर करने में मदद मिलती है।

तुर्की एयरलाइंस बनी कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी ताकत

इस्तांबुल एयरपोर्ट की वैश्विक कनेक्टिविटी बढ़ाने में तुर्की एयरलाइंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों में करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी एयरलाइन की है।

वर्ष 2026 में तुर्की एयरलाइंस करीब 130 देशों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है और उसके बेड़े में 500 से अधिक बोइंग और एयरबस विमान शामिल हैं। आधुनिक विमानों की बेहतर ईंधन दक्षता एयरलाइन के लिए परिचालन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। विमान ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच नया और ईंधन-कुशल बेड़ा प्रतिस्पर्धा में बढ़त देता है।

हीथ्रो और शिफोल की सीमाओं से इस्तांबुल को फायदा

यूरोप के दूसरे बड़े विमानन केंद्रों की सीमाओं ने भी इस्तांबुल एयरपोर्ट के लिए अवसर पैदा किए हैं। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट में तीसरे रनवे की योजना लंबे समय से पर्यावरणीय और स्थानीय विरोध का सामना कर रही है। दूसरी ओर, एम्स्टर्डम के शिफोल एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या को लेकर सीमाएं लागू हैं।

इसके मुकाबले इस्तांबुल एयरपोर्ट शहर के बाहरी इलाके में विशाल क्षेत्र में बना है। यहां 24 घंटे संचालन की सुविधा के साथ विस्तार के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। यही कारण है कि इसे यूरोप के प्रमुख प्रतिस्पर्धी एयरपोर्टों के मुकाबले अतिरिक्त बढ़त मिल रही है।

वैश्विक संकटों के बीच भी मजबूत हुई कनेक्टिविटी

रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्यपूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक विमानन व्यवस्था को प्रभावित किया है। क्षेत्र के कई एयरपोर्टों को उड़ानों में कमी और मार्गों में बदलाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद इस्तांबुल की भौगोलिक स्थिति और तुर्की के अंतरराष्ट्रीय संबंधों ने एयरपोर्ट को अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनाए रखा।

तुर्की एयरलाइंस का स्टॉपओवर कार्यक्रम भी इस्तांबुल को पर्यटन से जोड़ने में मदद करता है। लंबी अवधि के ट्रांजिट वाले यात्रियों को इस्तांबुल में रुककर शहर घूमने और साझेदार होटलों में ठहरने की सुविधा दी जाती है। इससे एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

चीन के एयरपोर्ट दे सकते हैं बड़ी चुनौती

हालांकि आने वाले वर्षों में इस्तांबुल के सामने चीन के बड़े एयरपोर्टों से चुनौती बढ़ सकती है। ओएजी के विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार वर्षों में चीनी विमानन केंद्र वैश्विक कनेक्टिविटी की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

चीनी एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और नए मार्गों के बढ़ने से वहां के बड़े एयरपोर्टों की भूमिका भी मजबूत हो रही है। फिलहाल इस्तांबुल के पास अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए मजबूत भौगोलिक स्थिति, तेजी से विस्तार करती राष्ट्रीय एयरलाइन और विशाल विमानन बुनियादी ढांचा मौजूद है। यही वजह है कि इस्तांबुल एयरपोर्ट यूरोप, एशिया और मध्यपूर्व को जोड़ने वाले दुनिया के प्रमुख विमानन केंद्रों में अपनी जगह मजबूत करता जा रहा है।

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